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फरहान अख्तर और ग्लोबल मार्किट

बॉयकाट बॉलीवुड क्यों है? ट्रेंड...

बड़ी उम्र के हीरो छोटी उम्र की हीरोइन से इश्क लड़ाते है

क्या होगा लाल सिँह चड्डा का????

क्या आज की सरकार फ़िल्म इंडस्ट्री को नहीं चाहती?

एक सम्पूर्ण कलाकार संजीव कुमार

एक धुन सी है

मन मोहके ये सारा सारा गांव ओ मितवा!

राज कपूर का एक अलग अंदाज था फिल्माने

अंधेरा पसंद नहीं मुझे

सिनेमा मेरा पैशन है....

अभी सीख रही और सेट कर रही हूँ

रोज सुबह ऑंखें खुल जाती है

आज मैंने सीखा ब्लॉग के बारे में

लेखकों का नहीं होता सम्मान..

भेड़चाल में फंसा बॉलीवुड

अपराध जगत से जुड़ गया था बॉलीवुड

जनता की समस्या से मतलब नहीं

सच स्वीकारने की हिम्मत नहीं है

कुछ भी नया नहीं कर पा रहें

सिनेमा पृथ्वीराज कपूर से पृथ्वीराज तक

भोजपुरी फ़िल्म जैसा हाल हो गया फ़िल्म इंडस्ट्री का

वाफीक नहीं हीरो पृथ्वीराज से

पृथ्वीराज फ्लॉप क्यों?

पहले सिनेमा होता था

अब दर्शकों में वो उत्सुकता नहीं रही

कनेक्ट नहीं हो रहें ऑडीयंस

फ्लॉप मूवी आ रही है आजकल

लोग बॉलीवुड से नहीं जुड़ पा रहें है

टोनी की याद आती है तो लगता है उसके पास ही जाना होगा मुझे...

क्यों पृथ्वीराज मूवी वैसी नहीं है...

bnaras ki byar: अपने बचपन के वे दिन याद आते है , जब बुआ जी के घर म...

लड़का बोला -मेरी वाली...

nav vadhu: बुआजी के घर की यादें  आज भी आती है  वो, बिदाई गीत...

nav vadhu: प्रिय निशु  तुम पर अभी कविता नही  किन्तु, ये खत है...

nav vadhu: आश्चर्य ये है, की नववधू की रीडिंग १७ नवंबर को हुई ...

nav vadhu:  आज अचानक ३ रीडिंग हुई है, नववधू की ये किसी नववधू ...

nav vadhu: जब किसी के प्रति ये हो कि  उसे देखे बिना आप को ठीक...

nav vadhu: रूप रंग सलोना फिर भी हो अबोला कंही तो, एक नज़र पा  ...

maa ka daur: maa ka daur

bnaras ki byar: bnaras ki byar: पुराणी अभिनेत्री मीनाकुमारी के अंत...

bnaras ki byar: bahut dinon se

bnaras ki byar: bnaras ki byar: आज आसमान में आज आसमान में पखेरुओं ...

bnaras ki byar: अपने बचपन के वे दिन याद आते है , जब बुआ जी के घर म...

bnaras ki byar: bnaras ki byar: क्याक्या सिर्फ  मौसम गीत गाते है य...

bnaras ki byar: हमारी दुनिया किस दिशा में जा रही है  मैंने अपनी जि...

पुष्पा in trend

अकेले है तो क्या गम है?

इधर -उधर के चक्कर में

लोग pls!पैसे नहीं मांगे

अच्छी खबरें नहीं आ रही जिससे निराश हूँ

ऐसा सपना देखा है मैंने

बचपन था तो सपने थे

बचपन में पढ़ती थी माधुरी

सौंदर्य भाव को स्वीकृति दिलाये थे राज साहब ने पर ये मर्यादित सौंदर्य था

राजकपूर थे स्वप्नदृष्टा निर्देशक

याद आते है मुझे V. शांताराम

मै भोर का सिनेमा लिखती हूँ

सिनेमा के सपने सँग जीवन बिता

कोरोना फैला है क्या करें अब

कल मुझे मध्य प्रदेश की लड़कियां मिल गईं

शायद लॉक डाउन लग जाये फिर

रच रही हूँ सुबह का सिनेमा

मुझे गोरखनाथ पर मूवी बनाना है

भोर का सिनेमा रचना है

हमें मासूम से सिनेमा की जरूरत है

भोर में उगे ध्रुव तारे जैसा सिनेमा

ये सुबह का सिनेमा है..

वो मेटिनी शो के दिन

सिनेमा का सम्मान करें!

आओ!सुबह का सिनेमा रचे!

बॉलीवुड फिर से उठ खड़ा होगा

ससुर और पति से मिली संघर्ष की प्रेरणा

बॉलीवुड से हूँ और उसके ही गुण गाती हूँ

फिर वंही लॉक डाउन

विंडसर

लगातार व्यस्ततावश नहीं लिख पा रही हूँ

आज ज्यादा नहीं लिख पाई

जिन्हें सिनेमा से प्यार होता है

क्यों रह जाता है अकेला सिनेमा रचने वाला

बेहद अकेला होता है सिनेमा रचने वाला

जो अभी तक किया गया है बेहद खास है

मेहनत तो सभी कर रहे है