भोर का सिनेमा रचना है
मुझे भोर का सिनेमा रचना है सिर्फ भक्ति नहीं शक्ति और वैराग्य नहीं कर्तव्य भी.
एक नई परम्परा और उद्देश्य एक नई व्याख्या मुझे करनी है लाना है उदासी से निकालना है भक्ति को.
भक्ति बोझ नहीं जीवन का आनंद हो हम भक्ति से शक्ति और जोश पाये, तब भक्ति का मजा आएगा.
ऐसा सिनेमा रचना है जिसमें सबकुछ हो जिसमें सवालों के जवाब हो नई व्याख्या हो और हक़ीक़त हो.
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